अशोक नगर

ashok nagar map

कहा जाता है कि उज्जैन को जीतने के बाद सम्राट अशोक ने यहाँ विश्राम किया था । इस कारण इसका नाम अशोकनगर पड़ा।

अशोकनगर को गुना से अलग एक नए जिले के रूप में 16 वर्ष ही पूर्ण हुए है। इस तरह अभी तक यह युवा जिला ही माना जायेगा।
भौगोलिक दृष्टि से यह मालवा उत्तरी पठार का हिस्सा है। इसका कुछ भाग बुंदेलखंड अंतर्गत आता है। यह जिला वेतवा और सिंध नदी के मध्य में है।
ऐतिहासिक दृष्टि से देखे नगर अशोक नगर का अपना कोई विशिष्ट इतिहास नही रहा। जिन शासकों ने ईशागढ , चँदेरी , बजरंग गढ़ आदि पर शासन किया ।उन्ही के साम्रज्य का हिस्सा यह नगर भी रहा होगा।

ग्वालियर स्टेट गज़ेटियर के अनुसार अकबर के शासनकाल में यह चँदेरी सरकार के एक मुहाल का यह सदर मुकाम था।
सन 1901 में इसकी जनसंख्या केबल 2332 थी। यह पछार के नाम से ईशागढ जिला और तहसील का एक गाँव मात्र था। सन 1897 में बीना गुना बारां रेलवे लाइन पर यह स्टेशन बना।
इससे इसकी उन्नति के द्वार खुल गए। सन 1901 में यहाँ पुलिस थाना , डाकखाना , मदरसा , मंडी और इंस्पेक्सन बंगाल बन गया था।
ग्वालियर राज्य में जिला पुनर्गठन आयोग की सिफारिश पर सन 1904 में बजरंगगढ़ और ईशागढ जिले को मिला कर ईशागढ नाम से एक जिला बनाया गया। पर गुना , अशोकनगर अभी तक गांव मात्र थे। गुना में छावनी थी । रेलवे स्टेशन बनने से गुना की भी उन्नति हुई । सन 1922 में जिला गुना नगर में स्थानांतरित कर दिया गया। पर अशोकनगर अब तक गांव ही था।


chanderi
सन 1937 में जिले का नाम ईशागढ के स्थान पर गुना हुआ। ईशागढ़ और बजरंगगढ़ तहसील बनी रही। पछार ईशागढ तहसील का गाँव था । संभवतः सन 1940 या उसके बाद तहसील बजरंग गढ़ से गुना आई। तभी संभवतः अशोकनगर भी ईशागढ से अलग तहसील बनी होगी।
15 अगस्त 2003 को अशोकनगर गुना से अलग होकर नया जिला बना। इस प्रकार देखे तो लगभग 60 वर्ष में अशोकनगर एक गाँव से जिला बन गया।

0 Comments

There are no comments yet

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.