जब अपहरण करते थे तब उनके माता-पिता और बच्चों के बारे में नहीं सोचा

ग्वालियर. सत्र न्यायालय में मासूम बच्चियों के अपहरण के मामले में सजा सुनाए जाने से पहले आरोपी महिला लक्ष्मीबाई उर्फ मुन्नी बाई कुशवाह के आवेदन को कोर्ट ने यह कहते हुए खारिज कर दिया कि जब दोनों मां-बेटे मासूम बच्चियों का अपहरण करते थे तब क्या उन्होंने कभी यह सोचा कि इससे उस बच्ची और उसके माता-पिता पर क्या बीत रही होगी। यह कहते हुए न्यायालय ने मुन्नी बाई और उसके बेटे को चार-चार साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है।
सत्र न्यायाधीश दीपक कुमार अग्रवाल ने मासूम बच्चियों का अपहरण कर उनसे देह व्यापार कराने वालों को बेचे जाने के मामले में सजा भुगत रही लक्ष्मीबाई उर्फ मुन्नी…

समाचार पत्र मैं पूरा पढ़ें

0 Comments

There are no comments yet

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.