पड़ाव पुल का दर्द : मैं तो एक पांव पर तैयार खड़ा हूं, हर बोझ उठाने को राजी हूं….

ग्वालियर @ बकलम नरेंद्र कुइया

रोज पढ़-पढकऱ आप मेरे बारे में बहुत कुछ तो आप जान ही चुके होंगे, फिर भी परिचय देना मेरा फर्ज है। मैं हूं अधर में लटका ‘पड़ाव पुल’ जिसका आधिकारिक नाम है पड़ाव आरओबी। शहर को गति देने को मैं एक पांव पर तैयार खड़ा हूं, हर बोझ उठाने को राजी हूं, लांचिंग के लिए मेरा मेकअप भी हो चुका है…राह में रोड़ा बना रही है तो यह सियासत। वे ही नेता रुकावट बन रहे हैं जिन्हें नागरिकों ने शहर विकास की जिम्मेदारी सौंप रखी है।

चलो मैं आपको शुरू से बताता हूं कि मैं यहां तक कैसे पहुंचा। करीब 70 वर्ष तक लश्कर से मुरार को जोडऩे वाले पड़ाव स्थित शास्त्री रेलवे ओवर ब्रिज ने शहर…

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