रंगपंचमी माँ जानकी करीला मेला करीला धाम अशोकनगर मप्र

karila mata mandir

मान्यता है की रामायण काल मैं महर्षि वाल्मीकि का आश्रम यहीं था व् लव और कुश का जन्म भी इसी प्रांगन मैं हुआ था |

जब होली के रंगों में भक्ति और वात्सल्य का रस मिल जाता है , तब ये रंग और गहरे हो जाते है।
भक्ति और वात्सल्य रस से सराबोर राई और बधाई नृत्य साधना का यह देश का सबसे बड़ा उत्सव है।
यहाँ का आनंद अद्भुत और अपूर्व है।
पधारिये इस भक्ति, वात्सल्य , रंग और नृत्य के आनंद उत्सव में।
अशोकनगर जिले में करीला धाम में रंगपंचमी के सीता जी पुत्र लव कुश के जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में विशाल मेले का आयोजन रंगपंचमी के अवसर पर होता है।
यह प्रदेश के बड़े मेलो में से एक है तथा मप्र तीर्थ एवं मेला प्राधिकरण में पंजीबद्ध होकर वित्तपोषित है।
कहा जाता है कि पौराणिक काल मे यहाँ महर्षि बसल्मीकि का आश्रम था। यही सीता जी ने लव , कुश को जन्म दिया था। कालान्तर में यह आश्रम लुप्त होकर टीले में दब गया।
लगभग 200 वर्ष पूर्व विदिशा जिले के दीपनखेड़ा गांव के महंत तपसी जी महाराज को स्वप्न हुआ कि बे करीला जाकर इस आश्रम को जाग्रत करें।
अपने स्वस्प्न के आधार पर तपसी जी महाराज करीला पहाड़ पर पहुँचे।
यहाँ करीला के पेड़ तब बड़ी संख्या में थे इस कारण यह स्थान करीला कहलाया। तपसी महाराज ने झाड़ झंखाड़ के बीच टीले में छुपे आश्रम को ढूढ़ निकाला ।
आसपास के ग्रामीणजनों के साथ साफसफाई कर आश्रम को जाग्रत किया। तपसी जी महाराज ने यहाँ रह कर लंबे समय तक तपस्या की।
उनके बाद यहाँ अयोध्या से बलराम दास जी आये उन्होंने यहाँ गौशाला की स्थापना की।
बाद में यहाँ पंजाब प्रदेश से मथुरादास जी आये। इन्होंने यहाँ 12 वर्ष तक खड़े होकर तपस्या की। बे खड़ेसुरी कहलाये।
कहा जाता है कि महर्षि बाल्मीकि द्वारा लव कुश जन्म दिन धूमधाम से मनाया था जिसमे स्वर्ग से आकर अप्सराओं ने भी नृत्य किया था।
तब से ही रंगपंचमी के दिन लवकुश का जन्म दिन यहाँ मनाया जाता है। इसमे दूर दूर से नृत्य कलाकार आकर पूरे जोश और उत्साह से राई और बधाई नृत्य प्रस्तुत करते है। 

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यहाँ लोग मनौती मानते है और मन्नतें पूरी होती है तब यहाँ नृत्य कलाकारों को नचाते है। रंगपंचमी मेले में आने बाले श्रद्धालुओ की संख्या 10 लाख से 15 लाख तक होती है।
यहाँ नृत्य करने आने बाले कलाकारों की संख्या हजारों में होती है। नृत्य के माध्यम से भक्ति का यह देश का सबसे बड़ा उत्सव है।
यहाँ आने बाले श्रद्धालु यहाँ की भीड़ में खुद को भूल कर इन नृत्य आराधना में लीन नृत्यांगनाओं के आनंद में डूब जाते है। आप भी पधारे । जिला प्रशासन अशोकनगर ने आपकी सुविधा , सुरक्षा और ब्यबस्था हेतु सभी समुचित प्रबंध किए है।

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