सोन चिरैया विलुप्त, खतरे में तिघरा और पगारा के कैचमेंट

ग्वालियर. घाटीगांव -मोहना क्षेत्र की ५१२ वर्ग किलोमीटर भूमि पर स्थित सोन चिरैया अभयारण्य आने वाले कुछ वर्षों में अतीत की बात हो सकता है। कारण यह है कि वन क्षेत्र के २३ गांवों का डीनोटिफिकेशन कर दिया गया है, जल्द ही यह गांव अभयारण्य की शर्तों और सीमा से बाहर होंगे। यह प्रक्रिया पूरी होते ही ग्रामीणों को भले ही लाभ न हो, लेकिन क्षेत्र में मौजूद खनन माफिया को आजादी से काम करने की सहूलियत हासिल हो जाएगी और यहां जो पहाड़ बचे हैं, वे भी उत्खनन की भेंट चढ़ जाएंगे। इसके बाद बेखौफ खनन माफिया सफेद पत्थर निकालने के लिए मनमाने तरीके से काम करेंगे।

 

शहर के १३ लाख से अधिक लोगों के लिए…

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