चंदेरी स्थित कोषक महल की यह इमारत मध्यकालीन अफगान स्थापत्य कला का बेजोड़ नमूना है। इसका निर्माण मालवा के सुल्तान महमूद खिलजी ने सन 1445 में कराया था।
कहा जाता है इस इमारत का निर्माण जौनपुर के शर्की सुल्तान को पराजित करने के उपलक्ष्य में कराया गया था। कुछ इतिहासकार कालपी विजय के उपलक्ष्य में कराया जाना बताते है। यह भी कहा जाता है कि इस इमारत का निर्माण चँदेरी के लोगो को रोजगार देने के उद्देश्य कराया गया था।
तारीख -ए- फरिश्ता के अनुसार ” हिजरी 848 मालवा का सुल्तान महमूद खिलजी जब यहाँ से गुजरे तब उसने यहाँ कोशक- ए- हत्फ़ मंजिल अर्थात सात मंजिला इमारत बनाने का आदेश दिया। जिसकी तामील में यह इमारत बनाई गई। इसकी कारीगरी माण्डू जैसी है।
यह इमारत धन के आकार की है । जिसके चारों हिस्सा बराबर है। इस इमारत को सात मंजिला बनाने की योजना थी पर वर्तमान में इसकी तीन मंज़िल पूर्ण रूप से निर्मित है जबकि चौथी अपूर्ण है।
Koshak mahal
ऊपर की शेष मंज़िलों का निर्माण ही नही हुआ अथवा बे बाद में ध्वस्त हो गई । इस सम्बन्ध में स्पष्ट निष्कर्ष निकाला जाना संभव नही है।
कालान्तर में यह इमारत क्षतिग्रस्त हो गई। इसमे मलबा भरा था तथा यह जंगल से घिर गई थी।जगह जगह झाड़ झंखाड़ उग आए थे।
तत्कालीन ग्वालियर राज्य के शासक महाराजा सर माधवराव सिंधिया अलीजाह बहादुर के जमाने मे संवत 1979 सन 1922 में ग्वालियर पुरातत्व विभाग के सुपरिडेंट एम जी गर्दे के इसे साफ करा कर मरम्मत कराई और इसे दुरस्त कराया।

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