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Author: Rupesh Upadhyay

चंदेरी स्थित कोषक महल की यह इमारत मध्यकालीन अफगान स्थापत्य कला का बेजोड़ नमूना है। इसका निर्माण मालवा के सुल्तान महमूद खिलजी ने सन 1445 में कराया था। कहा जाता है इस इमारत का निर्माण जौनपुर के शर्की सुल्तान को पराजित करने के उपलक्ष्य में कराया गया था। कुछ इतिहासकार कालपी विजय के उपलक्ष्य में […]

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कहा जाता है कि उज्जैन को जीतने के बाद सम्राट अशोक ने यहाँ विश्राम किया था । इस कारण इसका नाम अशोकनगर पड़ा। अशोकनगर को गुना से अलग एक नए जिले के रूप में 16 वर्ष ही पूर्ण हुए है। इस तरह अभी तक यह युवा जिला ही माना जायेगा। भौगोलिक दृष्टि से यह मालवा […]

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कोटेश्वर महादेव मंदिर ग्वालियर नगर का प्रमुख और प्राचीन शिवालय है। एक देशस्थ मराठी ब्रह्माण्ड पंडित गंगाधर राव त्रयम्बक जी ने श्रीनाथ महादजी सिंधिया जी को कोटेश्वर शिवलिंग के इतिहास व् महत्ता को समझाया | जिसके बाद किले की तलहटी में इसका निर्माण मूलतः महायोद्धा श्रीनाथ महादजी शिन्दे महाराज द्वारा करवाया गया था। इसके ठीक […]

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कालप्रियनाथ धूमेश्वर महादेव मंदिर पवाया भितरवार(ग्वालियर) स्थिति मठ का संरक्षण एवं संधारण कार्य ” मप्र तीर्थ एवं मेला प्राधिकरण ” द्वारा कराया जाएगा। नागवंश कालीन इस मठ में महाकवि भवभूति ने अध्ययन भी किया और अध्यापन भी कराया । इसकी प्रशासकीय स्वीकृति जारी हो गई है। शीघ्र भूमिपूजन कार्यक्रम सम्पन्न होगा। अब यह मठ नए […]

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मध्य काल में सलीम और वीरसिंह बुन्देला जैसी मित्रता की दूसरी मिशाल देखने को नही मिलती है। दतिया का वीरसिंह जू देव महल दोनो की मित्रता की अमर निशानी है। यह महल मध्य काल में बुन्देलखण्ड में निर्मित इमारतों में स्थापत्य कला की दृष्टि से से सर्व श्रेष्ठ इमारत है। इस इमारत से मेरी पहिचान […]

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जयाजी राव सिंधिया ने राज्य के मंदिरों का जीर्णोद्धार कराया तथा माफियां दी । उन्होंने महाकाल मंदिर की व्यवस्था , माघ कार्तिक स्नान , शिवरात्रि श्रावण सोमवार उत्सव , चिता भस्म पूजा आदि का प्रबंध किया।

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ग्वालियर रियासत सेंट्रल इंडिया एजेंसी की सबसे बड़ी रियासत रही है। सन 1901 में इसकी आबादी 29 लाख 33 हजार एक थी, जिसमे 1538858 पुरुष एवं 1394143 महिलाएँ शामिल थी। सन 1931 की जनगणना में जनसंख्या बढ़कर 35 लाख 23 हजार 70 हो गई ।
इसका कुल क्षेत्रफल 25041 वर्गमील था । क्षेत्रफल में यह यूनान से भी बड़ी रियासत थी। इसकी सीमायें उत्तर – पूरब और उत्तर – पश्चिम में चम्बल आगरा , इटावा , धौलपुर , करौली ,जयपुर रियासत से लगी थी।

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तू दृढ़ता की प्रतिमूर्ति , सुरक्षा का साधन,
तू रणखोरों का का लोभ, समर का आकर्षण।
मैं भीमसिंह राणा की गौरव गाथा हूँ,
मैं उनकी अमर कीर्ति के गीत सुनता हूँ…….।

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ऐसाह और सिहोनिया मुरैना जिले की अम्बाह तहसील में प्राचीन ऐतिहासिक स्थान है। ऐसाह “ग्वालियर के तोमर वंश ” का उदगम स्थल है। ऐसाह को कभी “ऐसाह मणि” कहा जाता था। ऐसाह का मतलब ईश से है और समीप के गाँव सिहोनिया में अम्बिका देवी का मंदिर है। ईश और अम्बा ये स्थल कभी तोमर शक्ति की धुरी थे।

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12 February 1798 — 1833 ग्वालियर का बैजाताल महारानी बैजाबाई के नाम से है।उज्जैन का द्वारिकाधीश गोपाल मंदिर , शिवपुरी छत्री में बने राम सीता एवं राधा कृष्ण मंदिर , भदैया कुण्ड शिवपुरी में गोमुख एवं बारादरी , शिवपुरी का चिंताहरण मंदिर आदि का निर्माण महारानी बैजाबाई द्वरा ही कराया गया।यह सब जानने के बाद […]

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राजनीतिज्ञ केबल चुनाव के चिंता करता है और राजदर्शी आने बाली पीढ़ियों के कल्याण की। सिंधिया वंश के संस्थापक सरदार राणो जी शिंदे के पांचवे और अंतिम पुत्र महादजी सिंधिया पहिले राजदर्शी थे और फिर राजनीतिज्ञ। पानीपत के तीसरे युद्ध सन 1761 मे पराजय से मराठा शक्ति को गहरा आघात लगा था ।घायल अबस्था में […]

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