What
  • Automotive
  • Cinema Hall
  • Flights
  • Fun / Recreation
  • Healthcare
  • Hotels
  • Police
  • Real Estate
  • Restaurant
  • Services
  • Shopping
  • Uncategorized
Where

Blog

The Gwalior in which we are living far behind Metro’s . But do you know Gwalior has air-mail facility back in 1938. Started by none other then JRD Tata as Tata Airmail which was later turned to Air India . Source : Scroll.in

Read More

There are some parts of India that once visited get into your heart and won’t go-Gwalior Fort is such a Place! Gwalior fort is an 8th century hill fort which is located at Gwalior district in the central state of Madhya Pradesh. The name of Gwalior is derived from the saint from Gwalipa- the story behind this name is […]

Read More

THE LEGENDARY MUSICIAN OF HINDUSTANI CLASSICAL MUSIC Pt. Krishnarao Shankar Pandit  of Gwalior Gharana is acknowledged as a doyen of Hindustani Classical Music. He was born on 26th July 1893.  Pt. Krishnaraoji was groomed at a very early age by his illustrious and devoted father Pt. Shankar Pandit who was legend in himself and the late Ustad Nissar […]

Read More

पियूष मिश्रा का जन्म 13 जनवरी 1963 को मध्य प्रदेश के विरासतों वाले शहर ग्वालियर में हुआ था। पीयूष मिश्रा को उनक पिता की बड़ी बुआ ने गोद लिया था, जिसके बाद उनका नाम प्रियाकान्त शर्मा था। पीयूष मिश्रा ने अपनी पढाई कार्मेल कान्वेंट स्कूल, ग्वालियर से पूरी की है। बचपन से ही पीयूष सिंगिंग, […]

Read More

जयाजी राव सिंधिया ने राज्य के मंदिरों का जीर्णोद्धार कराया तथा माफियां दी । उन्होंने महाकाल मंदिर की व्यवस्था , माघ कार्तिक स्नान , शिवरात्रि श्रावण सोमवार उत्सव , चिता भस्म पूजा आदि का प्रबंध किया।

Read More

ग्वालियर रियासत सेंट्रल इंडिया एजेंसी की सबसे बड़ी रियासत रही है। सन 1901 में इसकी आबादी 29 लाख 33 हजार एक थी, जिसमे 1538858 पुरुष एवं 1394143 महिलाएँ शामिल थी। सन 1931 की जनगणना में जनसंख्या बढ़कर 35 लाख 23 हजार 70 हो गई ।
इसका कुल क्षेत्रफल 25041 वर्गमील था । क्षेत्रफल में यह यूनान से भी बड़ी रियासत थी। इसकी सीमायें उत्तर – पूरब और उत्तर – पश्चिम में चम्बल आगरा , इटावा , धौलपुर , करौली ,जयपुर रियासत से लगी थी।

Read More

तू दृढ़ता की प्रतिमूर्ति , सुरक्षा का साधन,
तू रणखोरों का का लोभ, समर का आकर्षण।
मैं भीमसिंह राणा की गौरव गाथा हूँ,
मैं उनकी अमर कीर्ति के गीत सुनता हूँ…….।

Read More

ऐसाह और सिहोनिया मुरैना जिले की अम्बाह तहसील में प्राचीन ऐतिहासिक स्थान है। ऐसाह “ग्वालियर के तोमर वंश ” का उदगम स्थल है। ऐसाह को कभी “ऐसाह मणि” कहा जाता था। ऐसाह का मतलब ईश से है और समीप के गाँव सिहोनिया में अम्बिका देवी का मंदिर है। ईश और अम्बा ये स्थल कभी तोमर शक्ति की धुरी थे।

Read More

12 February 1798 — 1833 ग्वालियर का बैजाताल महारानी बैजाबाई के नाम से है।उज्जैन का द्वारिकाधीश गोपाल मंदिर , शिवपुरी छत्री में बने राम सीता एवं राधा कृष्ण मंदिर , भदैया कुण्ड शिवपुरी में गोमुख एवं बारादरी , शिवपुरी का चिंताहरण मंदिर आदि का निर्माण महारानी बैजाबाई द्वरा ही कराया गया।यह सब जानने के बाद […]

Read More

राजनीतिज्ञ केबल चुनाव के चिंता करता है और राजदर्शी आने बाली पीढ़ियों के कल्याण की। सिंधिया वंश के संस्थापक सरदार राणो जी शिंदे के पांचवे और अंतिम पुत्र महादजी सिंधिया पहिले राजदर्शी थे और फिर राजनीतिज्ञ। पानीपत के तीसरे युद्ध सन 1761 मे पराजय से मराठा शक्ति को गहरा आघात लगा था ।घायल अबस्था में […]

Read More

अपने प्रेम को व्यक्त करने के लिए महादजी ने गन्ना बेगम के मकबरे पर फारसी में लिखवाया था, ‘आह-गम-ए-गन्ना बेग़म’, यानी गन्ना बेगम के गम में निकली आह। गन्ना नाम तो मां ने रखा ही इसलिए था कि वह गन्ने के रस से भी मीठा गाती थी। लेकिन गन्ना के यही गुण उसकी जिंदगी के […]

Read More