महादजी सिंधिया  / Mahadji Scindia

महादजी सिंधिया / Mahadji Scindia

राजनीतिज्ञ केबल चुनाव के चिंता करता है और राजदर्शी आने बाली पीढ़ियों के कल्याण की। सिंधिया वंश के संस्थापक सरदार राणो जी शिंदे के पांचवे और अंतिम पुत्र महादजी सिंधिया पहिले राजदर्शी थे और फिर राजनीतिज्ञ। पानीपत के तीसरे युद्ध सन 1761 मे पराजय से मराठा शक्ति को गहरा आघात लगा था ।घायल अबस्था में ...
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आह गम - ए - गन्ना बेगम Noorabad

आह गम – ए – गन्ना बेगम Noorabad

अपने प्रेम को व्यक्त करने के लिए महादजी ने गन्ना बेगम के मकबरे पर फारसी में लिखवाया था, ‘आह-गम-ए-गन्ना बेग़म’, यानी गन्ना बेगम के गम में निकली आह। गन्ना नाम तो मां ने रखा ही इसलिए था कि वह गन्ने के रस से भी मीठा गाती थी। लेकिन गन्ना के यही गुण उसकी जिंदगी के ...
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जौहर कुंड - ग्वालियर दुर्ग

जौहर कुंड – ग्वालियर दुर्ग

चित्तौड़ गढ़ के जौहर से सभी परिचित है पर इस तथ्य को कम लोग ही जानते है कि ग्वालियर दुर्ग पर भी बड़े जौहर हुए है। गोपांचल दुर्ग का इतिहास गीत , संगीत ,कला , साहित्य के साथ साथ शौर्य , पराक्रम , त्याग , बलिदान और आत्म उत्सर्ग के उदाहरणों से भरा हुआ है। ...
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Jora Alapur / जौरा अलापुर

Jora Alapur / जौरा अलापुर

क्या आप जानते हैं , इब्नबतूता 1342ई मैं मुरेना जिले के जोरा- अलापुर आया था  जौरा ग्वालियर स्टेट के दौरान सन 1904 तक सिकरवारी का सूबा अर्थात ज़िला मुख्यालय रहा है। सन 1905 में ग्वालियर स्टेट में जिला पुनर्गठन आयोग की सिफारिश पर तंवरघार सिकरवारी ज़िले को मिलाकर एक ज़िला बनाया गया जिसका मुख्यालय जौरा ...
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Sabalgarh / सबलगढ़

Sabalgarh / सबलगढ़

सबलगढ़ का इतिहास अत्यन्त प्राचीन है। महाभारत काल मे यह क्षेत्र ” चेदि ” राजाओं के अधीन रहा। प्राचीन भारत मे यह अलग अलग काल खण्डों में क्रमशः मौर्य , कुषाण एवं गुप्त राजाओं के अधीन रहा। 8वी से 12 सदी के बीच इस क्षेत्र पर गुर्जर प्रतिहार , चंदेल और कच्छपघात वंश के राजाओं ने ...
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