Facts

Maharaj Bada – The Architectural Marvel of India

Everybody has been a prey to history and even this beautiful place in Gwalior is not an exception. Decades of negligence, unawareness of its own people has thrown this magnificence into the dark pages of history. When somebody stands at the center of this Grand Maharaj Bada Circle of Gwalior , I am sure that they would freeze with awe if they are told what really this splendor means in terms of architecture. I can even bet and say that finding a circle of this architectural importance in contemporary world would nearly be impossible.

Read More

Moti Mahal – A starved legacy

Moti Mahal is on of the principal historical building of Gwalior. It has been the center of state power in central India for more than 130 years. It was constructed in 1825 by Scindia rulers of Gwalior in Hindu architectural style. Moti Mahal has more than 300 rooms. Gold has been polished on the walls of many rooms and columns of this historical building. Baijatal a cistern which was constructed to as an  Amphitheater in water adds a pearl in neck less . The gardens around Moti Mahal has an extensive network of Stone Fountains.

Read More

Samudra Mahal at worli mumbai : a lost palace of gwalior by the sea

This is the story of one of the most opulent private residence built in Mumbai. Today, Mukesh Ambani’s Xanadu called “Antilla” towers over the city of Mumbai. It undoubtedly holds the title of being the most lavish Mumbai residence ever built. However, Antilla did have predecessors who shared the title of the most opulent homes in Mumbai. As per my extensive research on this topic, the homes which would qualify as most opulent Mumbai residences would be Petit Hall of Sir Dinshaw Petits, Jay Mahal palace of Gaekwads of Baroda and Samudra Mahal palace of the Scindias of Gwalior.

Read More

रंगपंचमी माँ जानकी करीला मेला करीला धाम अशोकनगर मप्र

मान्यता है की रामायण काल मैं महर्षि वाल्मीकि का आश्रम यहीं था व् लव और कुश का जन्म भी इसी प्रांगन मैं हुआ था |

जब होली के रंगों में भक्ति और वात्सल्य का रस मिल जाता है , तब ये रंग और गहरे हो जाते है।
भक्ति और वात्सल्य रस से सराबोर राई और बधाई नृत्य साधना का यह देश का सबसे बड़ा उत्सव है।
यहाँ का आनंद अद्भुत और अपूर्व है।

Read More

कोटेश्वर महादेव मंदिर ग्वालियर

कोटेश्वर महादेव मंदिर ग्वालियर नगर का प्रमुख और प्राचीन शिवालय है। एक देशस्थ मराठी ब्रह्माण्ड पंडित गंगाधर राव त्रयम्बक जी ने श्रीनाथ महादजी सिंधिया जी को कोटेश्वर शिवलिंग के इतिहास व् महत्ता को समझाया | जिसके बाद किले की तलहटी में इसका निर्माण मूलतः महायोद्धा श्रीनाथ महादजी शिन्दे महाराज द्वारा करवाया गया था। इसके ठीक १०० वर्षों बाद इसका जीर्णोद्धार एवं नवीनीकरण श्रीमंत जयाजीराव शिन्दे द्वारा किया गया। कोटेश्वर में स्थापित शिवलिंग ग्वालियर दुर्ग पर स्थित शिवमंदिर में स्थापित था। यह तोमर वंश के आराध्य एवं पूजा का केंद्र था।

Read More

धूमेश्वर महादेव मंदिर मठ , अब नए रूप में

कालप्रियनाथ धूमेश्वर महादेव मंदिर पवाया भितरवार(ग्वालियर) स्थिति मठ का संरक्षण एवं संधारण कार्य ” मप्र तीर्थ एवं मेला प्राधिकरण ” द्वारा कराया जाएगा। नागवंश कालीन इस मठ में महाकवि भवभूति ने अध्ययन भी किया और अध्यापन भी
कराया ।
इसकी प्रशासकीय स्वीकृति जारी हो गई है। शीघ्र भूमिपूजन कार्यक्रम सम्पन्न होगा। अब यह मठ नए रूप में सामने आएगा।

Dhumeshwar Mandir math pawaya gwaior

proposed rennovation of dhumeshwar mandir pawaya bhitarwar gwalior

Tansen Sangeet Samaroh was started by Madho Rao Scindia in 1924

Tansen music festival gwalior was started by Maharaja Madho Rao Scindia-I in 1924. Here are some interesting fact about the festival

Famous singer K L Sehgal came at the Samadhi of Tansen just to eat the leaves of the Neem tree in 1940. It is said that the leave of the neem tree here improves vocal strength.
In the starting years of Tansen music festival. Dance was also held during the event and tawayafs were used to dance along with the music.

Read More

मित्रता का स्मारक है , दतिया का पुराना महल।

मध्य काल में सलीम और वीरसिंह बुन्देला जैसी मित्रता की दूसरी मिशाल देखने को नही मिलती है। दतिया का वीरसिंह जू देव महल दोनो की मित्रता की अमर निशानी है। यह महल मध्य काल में बुन्देलखण्ड में निर्मित इमारतों में स्थापत्य कला की दृष्टि से से सर्व श्रेष्ठ इमारत है।
इस इमारत से मेरी पहिचान और लगाव 25 वर्ष से भी ज्यादा समय से है। सन अस्सी के दशक में आठवी कक्षा में दतिया में जब एडमीशन हुआ तब पहली बार इस इमारत को देखा था।

Read More

Tata Airlines served Gwalior in 1938

The Gwalior in which we are living far behind Metro’s . But do you know Gwalior has air-mail facility back in 1938. Started by none other then JRD Tata as Tata Airmail which was later turned to Air India

.

Source : Scroll.in

तत्कालीन ग्वालियर राज्य की धार्मिक नीति

जयाजी राव सिंधिया ने राज्य के मंदिरों का जीर्णोद्धार कराया तथा माफियां दी । उन्होंने महाकाल मंदिर की व्यवस्था , माघ कार्तिक स्नान , शिवरात्रि श्रावण सोमवार उत्सव , चिता भस्म पूजा आदि का प्रबंध किया।

Read More