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Category: Facts

तू दृढ़ता की प्रतिमूर्ति , सुरक्षा का साधन,
तू रणखोरों का का लोभ, समर का आकर्षण।
मैं भीमसिंह राणा की गौरव गाथा हूँ,
मैं उनकी अमर कीर्ति के गीत सुनता हूँ…….।

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ऐसाह और सिहोनिया मुरैना जिले की अम्बाह तहसील में प्राचीन ऐतिहासिक स्थान है। ऐसाह “ग्वालियर के तोमर वंश ” का उदगम स्थल है। ऐसाह को कभी “ऐसाह मणि” कहा जाता था। ऐसाह का मतलब ईश से है और समीप के गाँव सिहोनिया में अम्बिका देवी का मंदिर है। ईश और अम्बा ये स्थल कभी तोमर शक्ति की धुरी थे।

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12 February 1798 — 1833 ग्वालियर का बैजाताल महारानी बैजाबाई के नाम से है।उज्जैन का द्वारिकाधीश गोपाल मंदिर , शिवपुरी छत्री में बने राम सीता एवं राधा कृष्ण मंदिर , भदैया कुण्ड शिवपुरी में गोमुख एवं बारादरी , शिवपुरी का चिंताहरण मंदिर आदि का निर्माण महारानी बैजाबाई द्वरा ही कराया गया।यह सब जानने के बाद […]

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राजनीतिज्ञ केबल चुनाव के चिंता करता है और राजदर्शी आने बाली पीढ़ियों के कल्याण की। सिंधिया वंश के संस्थापक सरदार राणो जी शिंदे के पांचवे और अंतिम पुत्र महादजी सिंधिया पहिले राजदर्शी थे और फिर राजनीतिज्ञ। पानीपत के तीसरे युद्ध सन 1761 मे पराजय से मराठा शक्ति को गहरा आघात लगा था ।घायल अबस्था में […]

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अपने प्रेम को व्यक्त करने के लिए महादजी ने गन्ना बेगम के मकबरे पर फारसी में लिखवाया था, ‘आह-गम-ए-गन्ना बेग़म’, यानी गन्ना बेगम के गम में निकली आह। गन्ना नाम तो मां ने रखा ही इसलिए था कि वह गन्ने के रस से भी मीठा गाती थी। लेकिन गन्ना के यही गुण उसकी जिंदगी के […]

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चित्तौड़ गढ़ के जौहर से सभी परिचित है पर इस तथ्य को कम लोग ही जानते है कि ग्वालियर दुर्ग पर भी बड़े जौहर हुए है। गोपांचल दुर्ग का इतिहास गीत , संगीत ,कला , साहित्य के साथ साथ शौर्य , पराक्रम , त्याग , बलिदान और आत्म उत्सर्ग के उदाहरणों से भरा हुआ है। […]

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क्या आप जानते हैं , इब्नबतूता 1342ई मैं मुरेना जिले के जोरा- अलापुर आया था  जौरा ग्वालियर स्टेट के दौरान सन 1904 तक सिकरवारी का सूबा अर्थात ज़िला मुख्यालय रहा है। सन 1905 में ग्वालियर स्टेट में जिला पुनर्गठन आयोग की सिफारिश पर तंवरघार सिकरवारी ज़िले को मिलाकर एक ज़िला बनाया गया जिसका मुख्यालय जौरा […]

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सबलगढ़ का इतिहास अत्यन्त प्राचीन है। महाभारत काल मे यह क्षेत्र ” चेदि ” राजाओं के अधीन रहा। प्राचीन भारत मे यह अलग अलग काल खण्डों में क्रमशः मौर्य , कुषाण एवं गुप्त राजाओं के अधीन रहा। 8वी से 12 सदी के बीच इस क्षेत्र पर गुर्जर प्रतिहार , चंदेल और कच्छपघात वंश के राजाओं ने […]

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Gohad
14 October

The rule of Jaats started at Gohad in the reign of Sinhan Dev Pratham of Pachokhara . The independent authority of Jaat rulers on Gohad belongs to Sikandar Lodhi (1489-1517 AD) and Maansingh tomar of Gwalior. But the jaat rulers were very positive and gets supports from each and every one. Almost 15 rulers ruled […]

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Alampur
13 October

Alampur was built on the name of Alam Shah Pavar who came here as the governor of province. No one knows about the origin of the Alampur Fortress but we can make supposition according to its architecture that this must be built around 14-15th century. There are two entrance one at East and other one […]

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Ater
11 October

Ater is situated 30 kms north west of the Bhinds district headquarters. Its ancient name ” Udaynagari ” was acquired from the records of Bhadoria rulers. During 1700 AD the Bhadoria rulers here was on there climax period but there rulers were never remained independent .Earlier they are subordinates of Mughals and Later they remain […]

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