Personality

Dr Krishna Rao Pandit

Pt. Krishnarao Shankar Pandit  of Gwalior Gharana is acknowledged as a doyen of Hindustani Classical Music. He was born on 26th July 1893.  Pt. Krishnaraoji was groomed at a very early age by his illustrious and devoted father Pt. Shankar Pandit who was legend in himself and the late Ustad Nissar Hussain Khan.  Not only was noted for his unique and incomparable vocal music but also for devoting his entire life to the service of music and its propagation amongst the masses.

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पियूष मिश्रा / PIYUSH MISHRA

पीयूष मिश्रा ने अपनी पढाई कार्मेल कान्वेंट स्कूल, ग्वालियर से पूरी की है। बचपन से ही पीयूष सिंगिंग, पेंटिंग और एक्टिंग में दिलचस्पी रखते थे। उन्होंने ग्वालियर फाइन आर्ट्स कॉलेज मैं दाखिला तो लिया लेकिन एक्टिंग के शौक ने उन्हें नेशनल स्कूल ऑफ़ ड्रामा पहुंचा दिया।

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बैजाबाई / Baijabai

ग्वालियर का बैजाताल महारानी बैजाबाई के नाम से है।उज्जैन का द्वारिकाधीश गोपाल मंदिर , शिवपुरी छत्री में बने राम सीता एवं राधा कृष्ण मंदिर , भदैया कुण्ड शिवपुरी में गोमुख एवं बारादरी , शिवपुरी का चिंताहरण मंदिर आदि का निर्माण महारानी बैजाबाई द्वरा ही कराया गया।
यह सब जानने के बाद महारानी बैजाबाई के बारे में जानने की इच्छा बार बार मन मे होती , पर उनके बारें में ज्यादा कुछ पता नही लग पा रहा था।इतिहास की पुस्तकों में यह विवरण अत्यंत संक्षिप्त रूप में ही मिला पाया जिससे उनके व्यक्तित्व और कृतित्व के बारे में ज्यादा कुछ अंदाज नही लग रहा था।

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महादजी सिंधिया / Mahadji Scindia

राजनीतिज्ञ केबल चुनाव के चिंता करता है और राजदर्शी आने बाली पीढ़ियों के कल्याण की। सिंधिया वंश के संस्थापक सरदार राणो जी शिंदे के पांचवे और अंतिम पुत्र महादजी सिंधिया पहिले राजदर्शी थे और फिर राजनीतिज्ञ। पानीपत के तीसरे युद्ध सन 1761 मे पराजय से मराठा शक्ति को गहरा आघात लगा था ।घायल अबस्था में महादजी को छोड़कर राणो जी के सभी पुत्र मारे गए थे।
पानीपत की पराजय के आघात से मराठा शक्ति उबारने और उसे चरमोत्कर्ष पर पहुंचाने का काम महादजी जैसे योद्धा और राजदर्शी ही कर सकते थे।

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आह गम – ए – गन्ना बेगम Noorabad

अपने प्रेम को व्यक्त करने के लिए महादजी ने गन्ना बेगम के मकबरे पर फारसी में लिखवाया था, ‘आह-गम-ए-गन्ना बेग़म’, यानी गन्ना बेगम के गम में निकली आह।

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Nida Fazli – खोया हुआ सा कुछ

Born and brought up in Gwalior (some sources says he was born in daily and brought up in gwalior ) in the year 1938 to a kashmiri family, Nida Fazli’s full name is Muqtida Hasan Nida Fazli. He is a profecient and very well-known Hindi & Urdu poet. His parents migrated to Pakistan after partition, but he chose to stay back in India. Apart from poetry, Fazli also wrote for Blitz and Dharmayug magazines.

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Satyendra Singh Lohiya – a paramlipian who crossed english channel

he English Channel is one of the busiest stretches of open water in the world. Many swimmers have tried to navigate the 34km of sea from the south coast of Great Britain to the northern coast of France, but few have made it.
Satyendra was born in an under-privileged family in the year 1987 in a small village of district Bhind in Madhya Pradesh. 15 days after his birth, Satyendra was infected with Pneumonia. Improper medical care and reaction to medicines led to 60% of permanent disability in both his legs. His parents fought financial crisis to get him a primary education in the village

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Ramchandra Moreshwar Karkare

A follower of Indian nationalist Subhas Chandra Bose, Ramchandra Moreshwar Karkare, of Gwalher (Gwalior) Madhya Bharat, wrote a patriotic drama Jai Hind in March 1947 and published a book in Hindi, with the same title. Later, Karkare became Congress president of Central India Province.

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मीत ब्रदर्स / Meet Bros

मीत ब्रदर्स एक हिंदी फिल्म संगीत निर्देशक जोड़ी है। इन्होने मिलकर कई बॉलीवुड फिल्मों के लिए संगीत दिया है।इस जोड़ी में मनमीत सिंह और हरमीत सिंह शामिल हैं। पहले इसमें अंजान भट्टाचार्य भी शामिल थे और वे मीत ब्रदर्स अंजन कहलाते थे पर 2015 में भट्टाचार्य तिकड़ी से प्रथक हो गए और उन्होंने अपना खुद का संगीत व्यवसाय शुरू किया। तीनों ने मिलकर कई फिल्मों में हिट संगीत दिया है। 2014 में उनके द्वारा रचित सन्नी लियोन पर फिल्माया गया था, काफी मशहूर और हिट हुआ।
मीत ब्रदर्स भाई हैं। इनका परिवार पंजाबी है और वे ग्वालियर में रह

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शरद केलकर / Sharad kelkar

शरद केलकर का जन्म 7 अक्टूबर 1976 मे ग्वालियर मैं हुआ | बचपन में ही अपने पिता को खोने के बाद उनकी माताजी व् बड़ी बहन ने उनका हमेशा ख्याल रखा | शरद केलकर की पूरी शिक्षा ग्वालियर मैं ही हुई | उन्होंने ग्वालियर के प्रेस्टीज इंस्टिट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट एंड रिसर्च से मार्केटिंग में एम् बी ऐ किया | शिक्षा के उपरांत उन्होंने एयरटेल में पार्ट टाइम नौकरी शुरू की व् जीवाजी क्लब में जिम कोच बन गए |

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