कोटेश्वर महादेव मंदिर ग्वालियर

koteshwar mandir gwalior

कोटेश्वर महादेव मंदिर ग्वालियर नगर का प्रमुख और प्राचीन शिवालय है। एक देशस्थ मराठी ब्रह्माण्ड पंडित गंगाधर राव त्रयम्बक जी ने श्रीनाथ महादजी सिंधिया जी को कोटेश्वर शिवलिंग के इतिहास व् महत्ता को समझाया | जिसके बाद किले की तलहटी में इसका निर्माण मूलतः महायोद्धा श्रीनाथ महादजी शिन्दे महाराज द्वारा करवाया गया था। इसके ठीक १०० वर्षों बाद इसका जीर्णोद्धार एवं नवीनीकरण श्रीमंत जयाजीराव शिन्दे द्वारा किया गया। कोटेश्वर महादेव मंदिर ग्वालियर में स्थापित शिवलिंग ग्वालियर दुर्ग पर स्थित शिवमंदिर में स्थापित था। यह तोमर वंश के आराध्य एवं पूजा का केंद्र था।बाद में ग्वालियर दुर्ग मुगलों के अधीन आया।औरंगजेब शासन काल मे इस देवस्थान को तोड़ कर तहस नहस कर इसके शिवलिंग को किले से नीचे परकोटे की खाई में फेंक दिया गया।कहा जाता है कि इस शिवलिंग को सर्पो के घेर लेने से मुगल इसे क्षतिग्रस्त नही कर सके। केबल मंदिर को ही तोड़ कर चले गए।लगभग 150 वर्ष तक यह शिवलिंग किले के कोट में सर्पो की रक्षा में मलबे में दबा बना रहा।

Koteshwar Mahadev Mandir

कहते है कि संत देव महाराज को सर्पों से रक्षित शिवलिंग के सपने में दर्शन हुए तथा मंदिर बना कर स्थापना का आदेश हुआ।तब उनके अनुरोध पर महाराज जयाजी राव सिंधिया ने मलबे को हटबा कर शिवलिंग निकलबाया ।भव्य मंदिर बनबा कर शिवलिंग की स्थापना कराई। चूंकि शिवलिंग किले के कोट से निकला था । इसलिए इसका नाम कोटेश्वर रखा गया। इस मंदिर के भीतर दीवारों पर शिव महिमा पर आधारित सुन्दर भित्ति चित्र बनाये गए है जो आज भी सुरक्षित है। सिंधिया राजवंश में इस देस्थान की बहुत मान्यता है । ग्वालियर स्टेट में मालवा में जो मान्यता महाकाल की थी , वही उत्तरी ग्वालियर में कोटेश्वर कीमानी जाती रही । बर्तमान इस देवस्थान की देख रेख सिंधिया देवस्थान ट्रस्ट द्वारा की जाती है।

0 Comments

There are no comments yet

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.