ग्वालियर. मनुष्य का शरीर ज्ञान की अग्नि में तप कर पवित्र होता है। पवित्र शरीर में ही पवित्र आत्मा निवास करती है। जिस प्रकार सोना आग में तप कर चमक देता है, दूध के गर्म होने से बनी मलाई से निकला घी अधिक महत्वपूर्ण हो जाता है। उसी प्रकार ज्ञान की अग्नि में तपकर पावन हुई आत्मा में ईश्वर का वास होता है। व्यक्ति को अपने आचरण में सुधार कर ज्ञान की शरण में जाना चाहिए। आत्म शुद्धि के लिये इच्छाओं का रोकना तप धर्म है। यह विचार…

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