ग्वालियर रियासत सेंट्रल इंडिया एजेंसी की सबसे बड़ी रियासत रही है। सन 1901 में इसकी आबादी 29 लाख 33 हजार एक थी, जिसमे 1538858 पुरुष एवं 1394143 महिलाएँ शामिल थी। सन 1931 की जनगणना में जनसंख्या बढ़कर 35 लाख 23 हजार 70 हो गई ।
इसका कुल क्षेत्रफल 25041 वर्गमील था । क्षेत्रफल में यह यूनान से भी बड़ी रियासत थी। इसकी सीमायें उत्तर – पूरब और उत्तर – पश्चिम में चम्बल आगरा , इटावा , धौलपुर , करौली ,जयपुर रियासत से लगी थी।
पूर्व मैं झाँसी , सागर जिले से ,दक्षिण में भोपाल ,खिलचीपुर ,राजगढ़, टोंक रियासत से तथा पश्चिम में झालावाड़ ,कोटा , टोंक रियासत से लगी थी। मलवा के हिस्से के ज़िले बिखरे थे जो कई रियासतों से मिलते जुलते थे। सन 1931में क्षेत्रफल बढ़कर 26397 वर्ग मील हो गया।
रियासत का नाम ग्वालियर शहर के नाम पर था जिसका किला मज़बूती के ख्याल से हमेशा मशहूर मुकाम रहा था।
इस रियासत पर सिंद्धिया खानदान के महाराजे राज करते थे , जो घराना ग्वालियर पर राज करता था उसे क़ायम करने बाले रानू जी सिंद्धिया थे। रानू जी तमाम लड़ाइयों में शामिल हुए। सन 1736 में देहली तथा 1739 में निज़ाम और पुर्तगालियों से बेसीन में हुई लड़ाई प्रशिद्ध है।
रानो जी सिंद्धिया के शासन काल मे ही उज्जैन में महाकाल मंदिर का पुनर्निर्माण कराया गया। इसी समय क्षिप्रा पर रामघाट का निर्माण उनके दीवान रामदास सेंडवे ने कराया।
रानू जी के बाद महादजी सिंद्धिया हुए जिन्होंने मराठाओ की पानीपत के तीसरे युद्ध मे खोई प्रतिष्ठा को पुनः प्राप्त किया। नर्मदा से सतलज तक अपना वर्चस्व स्थापित किया। मुग़ल सम्राट उनके दिशा निर्देश पर निर्भर था । बे ग्रेट मराठा और दूसरे शिबाजी के रूप में भी जाने जाते है।
महादजी ने दौलत राव को गोद लिया। उन्के शासन काल मे अंग्रेज़ो से हार मान कर 30 दिसंबर 1801 को सरजी अंजन गांव की संधि करनी पड़ी।
इस संधि के कारण उन्हें गंगा ,दो आव का इलाका ,जयपुर ,जोधपुर क्षेत्र की रियासते ,अहमदनगर , सिरोंज ,बुरहानपुर आदि के इलाक़े छोड़ने पड़े। उत्तर में राज्य की सीमा चम्बल नदी तक सीमित कर दी गई ।
उनके शासन काल मे सन 1810 में राजधानी उज्जैन से ग्वालियर लाई गई। उन्ही ने लश्कर की नींव डाली । गोरखी महल ग्वालियर आसपास की इमारतें , उज्जैन का गोपाल मंदिर उन्ही के समय के निर्माण है।
दौलतराव के बाद जनकोजी राव गद्दी पर बैठे जो कमजोर शासक थे उनका अधिकांश समय बैजाबाई से संघर्ष में ही बीता।


इसके बाद जयाजीराव ग्वालियर के शासक हुए उनके कार्यकाल में उनके मंत्री सर दिनकरराव ने शासन प्रबंध एवं भूमि ब्यबस्था में व्यापक सुधार किए। जयविलास पैलेस , मोतीमहल , महाराज बाड़े ग्वालियर की इमारतों का निर्माण उन्ही कार्यकाल में हुआ । सन 1857 का प्रथम स्वाधीनता संग्राम उन्ही के समय की प्रमुख घटना है।
उनके कार्यकाल में ग्रेट इंडिया पेनिन शुला कम्पनी को आगरा – ग्वालियर , तथा राजपुताना मालवा रेलवे को इंदौर – नीमच शाखा बनाने के लिए 75 लाख रुपये कर्ज़ तथा भूमि सन 1875 में दी गई।
सन 1886 में महाराज माधव राव शासक बने । उनके कार्यकाल में राज्य में हर क्षेत्र में उन्नति हुईं।बे प्रजापालक थे तथा प्रजा के कल्याण के लिए अनेक काम कराए।
भूमि की पैमाइस कराकर बन्दोवस्त किया गया। सिचाई के तालाब और बांध बनाये गए उनसे नहरें निकाली गई। शिक्षा , चिकित्सा , पुलिस ,ज्यूडिशियल एवं पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट में भारी उन्नति हुई।
ग्वालियर लाइट रेलवे की ओर से ग्वालियर -शिवपुरी , ग्वालियर – भिण्ड , ग्वालियर – सबलगढ़ श्योपुर नैरोगेज ट्रेन आरम्भ की गई।

Gwalior Light Railways Started in 1904


माधव महाराज ने शिवपुरी को अपनी समर केपिटल बनाया । शिवपुरी में माधव विलाश पैलेश , ग्राण्ड होटल , जॉर्ज केसल , सेलिंग क्लब , सेक्रेट्रिएट टाउन हॉल , शिवपुरी क्लब , शिवपुरी की प्रशिद्ध छत्रियाँ , उज्जैन में फ्री गंज उन्ही के समय के निर्माण कार्य है।
अपनी रियासत के देवस्थानों की सेवा पूजा के लिए औकाफ बोर्ड बनाया और माफियां कायम की।उनके शासन काल मे फारेस्ट का भी बन्दोवस्त हुआ। देश का पहिला नियोजित माधव राष्ट्रीय उद्यान शिवपुरी उन्ही की देन है। बे ग्वालियर राज्य में लोक कल्याणकारी राज्य के प्रणेता थे
सन 1947 में देश की स्वाधीनता के समय ग्वालियर राज्य का भारत संघ में विलीनीकरण हो गया। इस समय महाराज जीवाजी राव सिंद्धिया ग्वालियर के शासक थे।
ग्वालियर राज्य में 290 जागीरें थी। जिसमे पोहरी , म्याना, बहादुर पुर , श्योपुर ,बड़ोदा , पहाडग़ढ़ , नेवरी ,भौंरासा , पान विहार बड़ी थी।
प्रमुख जागीरदार घरानों में बड़े शितोले , आंग्रे , जाधव , राजवाड़े , महाडिक , फ़ाल्के , पहाडग़ढ़ , श्योपुर बड़ौदा एवं श्री साहब सहित कुल बड़े 78 जागीदार राजा , नवाव , आदि शामिल है।
रियासत दो प्रान्तों उत्तरी ग्वालियर और मालवा में विभाजित थी, जो सर सूवा के निगरानी में थे। ग्वालियर की निगरानी सदर मुकाम से होती थी । उज्जैन में मालवा प्रान्त के सर सूवा का मुख्यालय था।
रियासत में गिर्द , तवारघार , भिण्ड , श्योपुर , नरवर , भेलसा , ईशागढ , उज्जैन , शाजापुर , मंदसौर , अमझेरा आदि ज़िले तथा 42 परगने थे। कुल 43 शहर /कस्बे तथा 10852 गाँव थे। 269061 एकड़ भूमि सिंचित थी। कुल मालगुज़ारी 92 लाख रुपये लगभग थी।
एक पोस्टमास्टर जनरल की देखरेख में में 139 डाक खाने थे। कुल 114 अदालतें कायम थी। 6 ज़िला 62 परगना जेल कायम थी।एक इंस्पेक्टर जनरल की निगरानी में 8900 पुलिस बल था। 115 पुलिस थाने 22 आउट पोस्ट तथा 181 चौकी राज्य में थी। प्रत्येक जिले में सुपरडेन्ट ऑफ पुलिस की पदस्थी थी जो सूबा ( कलेक्टर) के नियंत्रण में काम करता था
जयाआरोग्य हॉस्पिटल के अलावा रियासत में 135 हॉस्पिटल डिस्पेंन्सरी तथा लश्कर लश्कर ,मोरार ,ग्वालियर ,उज्जैन , मंदसौर ,शिवपुरी , भिण्ड , भांडेर , ,आगर ,बड़नगर और भेलसा में मेट्रिनिटी होम थे। इसके अलावा आयुर्वेदिक , यूनानी डिस्पेंन्सरी भी थी।
“घर का वैद्य “और “घर का हक़ीम” पुस्तक भी प्रकाशित की गई थी। सन 1930 – 31 में 10,84,205 मरीजों ने ऐलोपैथिक अस्पतालों से तथा 1,40,6,23 मरीजों ने आयुर्वेदिक यूनानी डिस्पेंसरीज से इलाज कराया था।
माधव कॉलेज उज्जैन , विक्टोरिया कॉलेज ग्वालियर के अलावा लड़कों के लिए 39 एवं लड़कियों के लिए 14 सेकेंडरी स्कूल थे। प्राइमरी स्कूल लड़कों के लिए 713 एवं लड़कियों के लिए 141 थे। इसके अलावा 113 लड़कों एवं 12 लड़कियों के लिए एडेड स्कूल थे। लड़को के लिए 125 एवं लड़कियों के लिए 8 स्कूल आत्मनिर्भर श्रेणी के भी थे।
तकनीकी शिक्षा के लिए टेक्निकल इंस्टिट्यूट लश्कर , चंदेरी , नरवर , मंदसौर ,उज्जैन में खोले गए। माफीदारा एवं पुजारियों के बच्चों की शिक्षा के लिए माधव ब्रम्हचार्याश्रम शिवपुरी के अलावा माधव म्यूज़िक कॉलेज एवं संस्कृत महाविद्यालय भी खोले गए थे।
लश्कर ,बड़नगर ,भांडेर, भिण्ड , गुना , ग्वालियर , खाचरोद ,मंदसौर , मुरेना , नीमच , सीपरी और उज्जैन में म्युनिस्पेलटी कायम थी ।
प्रत्येक जिले में सूवा(कलेक्टर) एवं परगने में कमासदार(तहसीलदार) पदस्थ थे। ग्वालियर राज्य में जयाजी प्रताप और ग्वालियर गज़ट दो समाचार पत्र प्रकाशित होते थे।

The Gwalior State Railway is the currently the longest narrow gauge railway in India. The lone Gwalior to Sheopur service passes through the bridge on the river Kuno.

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