महेश गुप्ता @ ग्वालियर. हौसले का दूसरा नाम है अजीत सिंह। दोस्त को बचाते हुए ट्रेन के नीचे आकर एक हाथ गवां बैठे। चोटें इतनी गंभीर कि डॉक्टरों ने बचने की उम्मीद कम ही बताई। पैरों में लकवा मारने का खतरा भी था। फिर भी इलाज शुरू हुआ तो डॉक्टरों ने दो माह में अजीत को पैरों पर खड़ा कर दिया। इसके एक माह बाद ही अजीत निकल पड़े नेशनल गेम्स खेलने।

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इवेंट में चौथे स्थान पर आए, लेकिन हौसला नंबर 1 पर रहा। अब नजरें थीं बीजिंग-2019 वल्र्ड पैरा एथलेटिक्स ग्रैंड प्री पर। अजीत ने मई में हुई इस…

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