भिण्ड। यूं तो भिण्ड देश में बागी के नाम से जाना जाता है, लेकिन यहां बनने वाले भुने खोआ से बने पेडे भी अपनी एक अलग पहचान बनाए हुए है। भिण्ड में बनने वाले पेड़े जैसा स्वाद 70 साल बाद भी कोई दूसरा नहीं दे पाया है।

नगर के सबसे पुरानी पेड़े की दुकान के संचालक राजीव जैन बताते है, पेड़े की बेहद खास है। वह रोज खुद दूध दुहाने के लिए जाते हैं ताकि शुद्ध दूध मिल सके। खोआ तैयार करने के बाद अन्य सामग्री के मिश्रण से पेड़े बनाने का काम शुरू करते हैं। सामग्री को भूनने की टाइमिंग ही स्वाद खास बनाती है। पेड़ा बनाने के लिए पिछली तीन पुश्तों से कारीगर नहीं रखते। वह अपने हलवाई खाने में किसी दूसरे…

समाचार पत्र मैं पूरा पढ़ें

Leave a Reply

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.