January 24, 2019

Facts

तत्कालीन ग्वालियर राज्य की धार्मिक नीति

जयाजी राव सिंधिया ने राज्य के मंदिरों का जीर्णोद्धार कराया तथा माफियां दी । उन्होंने महाकाल मंदिर की व्यवस्था , माघ कार्तिक स्नान , शिवरात्रि श्रावण सोमवार उत्सव , चिता भस्म पूजा आदि का प्रबंध किया।

तत्कालीन ग्वालियर राज्य

ग्वालियर रियासत सेंट्रल इंडिया एजेंसी की सबसे बड़ी रियासत रही है। सन 1901 में इसकी आबादी 29 लाख 33 हजार एक थी, जिसमे 1538858 पुरुष एवं 1394143 महिलाएँ शामिल थी। सन 1931 की जनगणना में जनसंख्या बढ़कर 35 लाख 23 हजार 70 हो गई ।
इसका कुल क्षेत्रफल 25041 वर्गमील था । क्षेत्रफल में यह यूनान से भी बड़ी रियासत थी। इसकी सीमायें उत्तर – पूरब और उत्तर – पश्चिम में चम्बल आगरा , इटावा , धौलपुर , करौली ,जयपुर रियासत से लगी थी।

गोहद का जाट राजवंश

तू दृढ़ता की प्रतिमूर्ति , सुरक्षा का साधन,
तू रणखोरों का का लोभ, समर का आकर्षण।
मैं भीमसिंह राणा की गौरव गाथा हूँ,
मैं उनकी अमर कीर्ति के गीत सुनता हूँ…….।

Personality

Dr Krishna Rao Pandit

THE LEGENDARY MUSICIAN OF HINDUSTANI CLASSICAL MUSIC Pt. Krishnarao Shankar Pandit  of Gwalior Gharana is acknowledged as a doyen of Hindustani Classical Music. He was born on 26th July 1893.  Pt. Krishnaraoji was groomed at a very early age by his illustrious and devoted father Pt. Shankar Pandit who was legend in himself and the late Ustad Nissar …

मीत ब्रदर्स / Meet Bros

मीत ब्रदर्स एक हिंदी फिल्म संगीत निर्देशक जोड़ी है। इन्होने मिलकर कई बॉलीवुड फिल्मों के लिए संगीत दिया है।इस जोड़ी में मनमीत सिंह और हरमीत सिंह शामिल हैं। पहले इसमें अंजान भट्टाचार्य भी शामिल थे और वे मीत ब्रदर्स अंजन कहलाते थे पर 2015 में भट्टाचार्य तिकड़ी से प्रथक हो गए और उन्होंने अपना खुद …

शरद केलकर / Sharad kelkar

शरद केलकर का जन्म 7 अक्टूबर 1976 मे ग्वालियर मैं हुआ | बचपन में ही अपने पिता को खोने के बाद उनकी माताजी व् बड़ी बहन ने उनका हमेशा ख्याल रखा | शरद केलकर की पूरी शिक्षा ग्वालियर मैं ही हुई | उन्होंने ग्वालियर के प्रेस्टीज इंस्टिट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट एंड रिसर्च से मार्केटिंग में एम् …

Travel

गोहद का जाट राजवंश

तू दृढ़ता की प्रतिमूर्ति , सुरक्षा का साधन,
तू रणखोरों का का लोभ, समर का आकर्षण।
मैं भीमसिंह राणा की गौरव गाथा हूँ,
मैं उनकी अमर कीर्ति के गीत सुनता हूँ…….।

एसाह / सिहोनिया

ऐसाह और सिहोनिया मुरैना जिले की अम्बाह तहसील में प्राचीन ऐतिहासिक स्थान है। ऐसाह “ग्वालियर के तोमर वंश ” का उदगम स्थल है। ऐसाह को कभी “ऐसाह मणि” कहा जाता था। ऐसाह का मतलब ईश से है और समीप के गाँव सिहोनिया में अम्बिका देवी का मंदिर है। ईश और अम्बा ये स्थल कभी तोमर शक्ति की धुरी थे।

आह गम – ए – गन्ना बेगम Noorabad

अपने प्रेम को व्यक्त करने के लिए महादजी ने गन्ना बेगम के मकबरे पर फारसी में लिखवाया था, ‘आह-गम-ए-गन्ना बेग़म’, यानी गन्ना बेगम के गम में निकली आह। गन्ना नाम तो मां ने रखा ही इसलिए था कि वह गन्ने के रस से भी मीठा गाती थी। लेकिन गन्ना के यही गुण उसकी जिंदगी के …