Category: .

2,000.00

रानोजी राव , जयाजी राव (प्रथम ) , दत्ताजीराव व् जनकोजी राव (द्वितीय ) ने किस प्रकार साहस का परिचय देते हुए मराठा ताकत मैं वृद्धि की , किस प्रकार महान महादजी ने तमाम कठिनाईयों में भारतभूमि को बाहरी अक्रमंकारियों के खुनी पंजों से बचाते हुए , अधर्म को झेलते हुए , धर्म संस्थापना की | किस कारण से उन्होंने अपना पूरा जीवन युद्धों मैं व्यतीत किया | इस पर अधिक प्रकाश डालती यह पुस्तक शिंदेशाही के वीर बलिदानियों , योद्धाओं और महा योद्धा महादजी की अमरगाथा सुनाती है |

कुटिल षड्यंत्रों व् जटिल समस्याओं ने किस प्रकार दौलतराव , बायजाबाई व् जनकोजी (तृतीय ) को घेरा यह भी इस पुस्तक के माध्यम से पाठकों को ज्ञात होगा | जयाजी राव (द्वितीय) शिंदे ने किस तरह ग्वालियर रियासत का विकास किया उसका भी विस्तृत विवरण यहाँ पढने को मिलेगा यह पुस्तक न केवल शिंदे राजवंश के शासकों पर प्रकाश डालती है अपितु अठारवी एवम उन्नीसवीं शताब्दी के भारत के वृहद इतिहास को भी दर्शाती है |
तत्कालीन परिस्थितियों में इस भारतभूमि पर क्या क्या हुआ , कैसे हुआ तथा क्यूँ हुआ , इन प्रश्नों का उत्तर देती यह पुस्तक तवारीख- ऐ – शिंदेशाही इतिहासवेत्ताओं एवम इस विषय मैं रूचि रखने वाले अन्य लोगों के लिए उपयोगी है |

Description

इस किताब के रचनाकार इतिहास संशोधक पंडित नीलेश ईश्वरचंद्र करकरे का जन्म ग्वालियर के एक कुलीन एवम विख्यात घराने में हुआ | सन 1861 में आपके पूर्वजों ने मराठा राज्य की सेवा करते हुए अपने प्राण भी न्योछावर किये तथा बाद मैं सन १८५७ की क्रांति मैं भी इस परिवार के लोग शहीद हुए | तदोपरांत सन 1925 से 1947 आपके पितामह (दादाजी ) ने अंग्रेजी हुकूमत को ललकारते हुए भारत छोड़ो आन्दोलन मैं बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया | आपने मराठा साम्राज्य , विशेषतः अठारवीं शताब्दी के इतिहास का गहन शोध किया है | शिंदे-शाही के वृहद इतिहास पर आप विशेषाधिकार रखते हैं |

Reviews

There are no reviews yet.

Be the first to review “तवारीख – ऐ – शिंदेशाही”

Your email address will not be published. Required fields are marked *