January 24, 2019

Sabalgarh / सबलगढ़

सबलगढ़ का इतिहास अत्यन्त प्राचीन है। महाभारत काल मे यह क्षेत्र ” चेदि ” राजाओं के अधीन रहा। प्राचीन भारत मे यह अलग अलग काल खण्डों में क्रमशः मौर्य , कुषाण एवं गुप्त राजाओं के अधीन रहा। 8वी से 12 सदी के बीच इस क्षेत्र पर गुर्जर प्रतिहार , चंदेल और कच्छपघात वंश के राजाओं ने शासन किया। मुगलों के आने के पूर्व यह क्षेत्र ऐसाह एवं ग्वालियर के तोमर राजाओं के अधीन रहा।अकबर के शासनकाल में यह क्षेत्र आगरा सूबा के अंतर्गत मंडरायल सरकार अधीन था। 17 वी सदी के अंतिम दशक में यहाँ नरवर के प्रधानमंत्री और सेनापति खाण्डेराव के नबल सिंह खंडेराव का शासन रहा।
18 सदी के आरंभ में यह सिकरवारों के अधीन था तदुपरांत करौली के जादौनो के अधीन रहा। ग्वालियर स्टेट गज़ेटियर के अनुसार सबलगढ़ को साबला गुर्जर ने बसाया था किंतु मौजूदा किले का निर्माण करौली के राजा गोपालसिंह द्वारा कराया गया।
सन 1750 ई. में यूरोपियन यात्री ट्रीफन थ्रेलर यहां होकर गुजरा। उसने अपने यात्रा वृतांत में ” सबलगढ़ किले को एक मजबूत किला ” होने का उल्लेख किया है।
सन 1795 में यह किला मराठाओं ने करौली के जदौनों से छीन लिया और मराठा सरदार खाण्डेराव को यहॉं का प्रशासक नियुक्त किया। सन 1809 में “जीन बैपेरिस्ट ” द्वारा इसे अपने अधिपत्य में ले लिया गया किन्तु कुछ समय पश्चात इसे मराठाओं को फिर बापस कर दिया गया।
ग्वालियर स्टेट के दौरान सर दिनकर राव (1859-62) की देखरेख में ब्रिटिश प्रशासनिक ब्यबस्था को अपनाया गया। ग्वालियर राज्य को ग्वालियर ,ईशागढ और मालवा तीन प्रान्तों में विभाजित किया गया। इन प्रान्तों को 19 जिलों और 62 परगनो में विभाजित किया गया।
इस प्रशासनिक ब्यबस्था में सबलगढ़ जिला बना , किन्तु स न 1904 में पुनर्गठन में प्रान्तों की संख्या तीन से घटा कर दो ग्वालियर और मालवा कर दी गई। इसी पुनर्गठन में जिलों की संख्या 19 से घटा कर 13 कर दी गई। सबलगढ़ ज़िले को श्योपुर ज़िले में सम्मलित कर दिया गया और सबलगढ़ परगना मुख्यालय रह गया।
ग्वालियर स्टेट के दौरान सबलगढ़ बहुत तरक्की हुई। नए ढंग का बाज़ार संतरों के नाम से बनाया गया। मदरसा , अस्पताल और रियासत का डाक खाना कायम किया गया।
सन 1880 में रेस्ट हाउस बनाया गया जो आज भी चम्बल डिवीजन का सबसे बेहतरीन रेस्ट हाउस है।सिंचाई की सुविधा के लिए सबलगढ़ , टोंगा जैसे कई तालाब बनबाये गए।
सन 1904 में ग्वालियर लाइट रेल्बे की ग्वालियर सबलगढ़ शाखा पर नैरोगेज ट्रेन चलाई गई जो यात्रियों की सुविधा के साथ – साथ अकाल के समय पानी और चारा आदि लाने ले जाने काम भी करती थी।
सन 1906 में राहत कार्यों के दौरान इसका निर्माण श्योपुरकलां तक किया गया।यह ट्रेन आज भी पिछले 114 साल से लगातार चल रही है जो एक ज़माने में इस क्षेत्र की जीवन रेखा रही है।
स न 1891 में सबलगढ़ कस्बे की आवादी 6111 थी ,1901 में आवादी 6039 रह गई जिसमें 3080 पुरुष एवं 2959 महिलाये थी।

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