ग्वालियर का बैजाताल महारानी बैजाबाई के नाम से है।उज्जैन का द्वारिकाधीश गोपाल मंदिर , शिवपुरी छत्री में बने राम सीता एवं राधा कृष्ण मंदिर , भदैया कुण्ड शिवपुरी में गोमुख एवं बारादरी , शिवपुरी का चिंताहरण मंदिर आदि का निर्माण महारानी बैजाबाई द्वरा ही कराया गया।
यह सब जानने के बाद महारानी बैजाबाई के बारे में जानने की इच्छा बार बार मन मे होती , पर उनके बारें में ज्यादा कुछ पता नही लग पा रहा था।इतिहास की पुस्तकों में यह विवरण अत्यंत संक्षिप्त रूप में ही मिला पाया जिससे उनके व्यक्तित्व और कृतित्व के बारे में ज्यादा कुछ अंदाज नही लग रहा था।

राजनीतिज्ञ केबल चुनाव के चिंता करता है और राजदर्शी आने बाली पीढ़ियों के कल्याण की। सिंधिया वंश के संस्थापक सरदार राणो जी शिंदे के पांचवे और अंतिम पुत्र महादजी सिंधिया पहिले राजदर्शी थे और फिर राजनीतिज्ञ। पानीपत के तीसरे युद्ध सन 1761 मे पराजय से मराठा शक्ति को गहरा आघात लगा था ।घायल अबस्था में महादजी को छोड़कर राणो जी के सभी पुत्र मारे गए थे।
पानीपत की पराजय के आघात से मराठा शक्ति उबारने और उसे चरमोत्कर्ष पर पहुंचाने का काम महादजी जैसे योद्धा और राजदर्शी ही कर सकते थे।